प्रो. (डॉ.) आरके सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
15 अगस्त 2026 भारत की स्वतंत्रता यात्रा के 79 गौरवशाली वर्षों का प्रतीक है और हमारे स्वतंत्र राष्ट्र के 80वें वर्ष में प्रवेश का अवसर भी। यह दिन केवल उत्सव और ध्वजारोहण का पर्व नहीं, बल्कि उन असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों के त्याग, साहस और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिनके संघर्ष ने हमें स्वतंत्र भारत की अमूल्य विरासत सौंपी।
1947 से 2026 तक भारत ने कठिनाइयों से उपलब्धियों, निर्भरता से आत्मविश्वास और चुनौतियों से संभावनाओं तक की अद्भुत यात्रा तय की है। लोकतंत्र, कृषि, विज्ञान, अंतरिक्ष, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, आधारभूत संरचना और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्रों में भारत की प्रगति उसकी सामूहिक शक्ति, प्रतिभा और संकल्प का प्रमाण है।
लेकिन वास्तविक स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं है। सच्ची स्वतंत्रता तब सार्थक होती है, जब हम अज्ञान से ज्ञान, भय से आत्मविश्वास, निराशा से आशा और निष्क्रियता से कर्मशीलता की ओर बढ़ें। भ्रष्टाचार, सामाजिक भेदभाव, अंधविश्वास, नकारात्मक सोच और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से मुक्ति भी राष्ट्रनिर्माण का अनिवार्य हिस्सा है।
आज आवश्यकता है कि हम ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करें जो केवल रोजगार की तलाश न करे, बल्कि ज्ञान, नवाचार, कौशल और आत्मविश्वास के बल पर नए अवसरों का निर्माण करे। शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिकता, संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का समावेश ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल तिरंगे को सलामी न दें, बल्कि अपने कर्मों से राष्ट्र को मजबूत बनाने का संकल्प लें। ईमानदारी, अनुशासन, उत्कृष्टता, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और अपने नागरिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन ही स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।
हमारे पूर्वजों ने हमें स्वतंत्र भारत दिया है; अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों को अधिक समृद्ध, सक्षम, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और गौरवशाली भारत सौंपें। आइए! अपने कर्मों से भारत की प्रतिष्ठा को और ऊँचा करें।
लेखक मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय (राज्य विश्वविद्यालय) सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में कृषि संकाय के अध्यक्ष (Dean) हैं
