18 वीं लोकसभा में अरुण गोविल, इमरान मसूद, इकरा हसन,भोला सिंह, जियाउर्रहमान बर्क और कंवर सिंह ने पूछे सौ से ज्यादा सवाल, पश्चिम के राजकुमार सांगवान और रुचि वीरा की उपस्थिति रही शत-प्रतिशत

सुरेंद्र सिंघल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
18 वीं लोकसभा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई सांसदों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से मतदाताओं पर अमिट छाप छोड़ी है। इनमें पहली बार चुने गए सांसदों ने सभी को बहुत प्रभावित किया है।  18 वीं लोक सभा गठन 19 अप्रैल 2024 से एक जून तक सात चरणों में हुए चुनावों के बाद हुआ। 4 जून 2024 को परिणाम आए थे। इस लोक सभा का पहला सत्र 24 जून 2024 से 3 जुलाई तक हुआ। अभी तक 8 सत्र हो चुके है। 8 वां सत्र महिला आरक्षण को लेकर अप्रैल 2026 में हुआ था। नौ वां सत्र इसी माह 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। लोकसभा के आठ सत्रों के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश के 16 में से मात्र दो सांसदों डाक्टर राजकुमार सांगवान रालोद (बागपत) और सपा सांसद रुचि वीरा (मुरादाबाद) ऐसी है जिनकी उपस्थिति शत- प्रतिशत रही है। दोनों ही पहली बार चुने गए सांसदों में शामिल है। 99 फीसद उपस्थिति वाले सांसदों में रालोद के बिजनौर से चुने गए युवा सांसद चंदन चौहान, सपा के मुजफ्फरनगर के पहली बार चुने गए सांसद हरेंद्र मलिक, भाजपा के तीसरी बार के
चुने गए डाक्टर भोला सिंह (बुलंदशहर) भाजपा के ही तीसरी बार चुने गए सतीश गौतम (अलीगढ़) बरेली से पहली बार चुने गए भाजपा सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार शामिल है। डा. भोला सिंह ने सबसे ज्यादा 197 सवाल पूछे। 
रामानंद सागर की रामायण में भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने वाले मेरठ से पहली बार निर्वाचित भाजपा सांसद अरुण कुमार गोविल ने 152 सवाल पूछकर मतदाताओं को गहरे से प्रभावित किया है। अमरोहा के दूसरी बार निर्वाचित भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर ने 150 सवाल पूछे है। कांग्रेस के तेजतर्रार सांसद इमरान मसूद (सहारनपुर) ने 109, कैराना (सहारनपुर मंडल) की पहली बार चुनी गई युवा एवं विदेश में शिक्षा प्राप्त इकरा हसन ने भी 123 सवाल पूछकर अपनी धाक जमाई है। संभल के युवा सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने 101 सवाल पूछे। रालोद के बागपत सांसद डा० राजकुमार सांगवान ने 40 बहसों में हिस्सा लिया। जबकि सबसे ज्यादा बहसों में हिस्सा लेने का श्रेय युवा दलित तेजतर्रार सांसद सहारनपुर के कस्बा छुटमलपुर निवासी नगीना से निर्वाचित चंद्रशेखर आजाद को जाता है। इकरा हसन ने 37, चंदन चौहान ने 35, हरेंद्र मलिक ने 31 बहसों में भाग लिया। बाकी सांसद का कामकाज साधारण स्तर का रहा।  अपना प्रभाव छोड़ने वाले सांसद क्या अपनी इस  उपलब्धि को भविष्य में जारी रख पाते है अथवा नहीं, इस पर जनमानस की नज़रें लगी रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार, सहारनपुर मंडल उत्तर प्रदेश

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