ऊंचाइयों पर पहुंच रहा सहारनपुर की लकड़ी नक्काशी का उद्योग

सुरेंद्र सिंघल/ गौरव सिंघल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

सहारनपुर। सहारनपुर का विश्व प्रसिद्ध लकड़ी की नक्काशी का कारोबार कारीगरों के पारंपरिक हुनर और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। एक जुलाई को सहारनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां के कारीगरों और इस हस्तशिल्प उद्योग की सराहना करते हुए कहा था कि 600 करोड़ का निर्यात होना मायने रखता है। सरकार यहां के कारीगरों का सम्मान करती है और इस व्यवयास को हर तरह का सहयोग प्रदान करने को दृढ़ संकल्पित है।
सहारनपुर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति के काष्टकला के मशहूर कारीगर 60 वर्षीय मोहम्मद असलम सैफी ने आज कहा कि पहले की तुलना में काष्टकला उद्योग अपना स्थान बरकरार नहीं रख पा रहा है। अमेरिका के द्वारा निर्यात शुल्क बढ़ाने और दूसरी अड़ंगेबाजी से कई तरह की दिक्कतें सामने आई हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि देश के सभी बड़े उद्योगपति जैसे मुकेश अंबानी के इस काष्टकला उद्योग में रूचि लेने और जिन फर्मों में वह बतौर कारीगर कार्य करते हैं अथवा कुशल कारीगरों का नेतृत्व करते हैं उनसे मुकेश अंबानी के सीधे जुड़ जाने के कारण इस हस्तशिल्प कारोबार में नई तकनीक जैसे लेजर और सीएनसी मशीनों का इस्तेमाल शुरू हो गया है। इन मशीनों का इस्तेमाल उत्पादों को तैयार करने में चीन में होता है। लेकिन मुकेश अंबानी जैसे बड़े उद्यमियों की कोशिश है कि लकड़ी के उत्पादों और निर्माण में लागत कम आए और कम समयावधि में ज्यादा से ज्यादा उत्पाद तैयार हों। अपनी इन्हीं खूबियों के चलते चीन इस कारोबार और निर्यात में पिछाड़े हुए है।
असलम सैफी फ्रांस, अमेरिका, यूरोप आदि मुल्कों के बड़े खरीदारों के मुताबिक डिजाइन तैयार करते हैं और उसी के आधार पर उत्पाद तैयार करते हैं। फर्नीचर, लाइट लैंप, होटलों में प्रयुक्त सामान, आभूषण, साइन बोर्ड, हाथ के जरिए कारीगरी, जालीदार परदे, टेबल, कुर्सी और उत्कृष्ट एवं आकर्षक सामग्री के उत्पाद यहां से निर्यात हो रहे हैं। असलम सैफी कहते हैं कि लेजर मशीन से लकड़ी पर महीन नक्काशी की जाती है और सीएनसी मशीन से लकड़ी पर कटिंग की जाती है। लेजर से नक्काशी होने पर वह एक समान दिखती है और सीएनसी मशीन से भी कटिंग एक समान होती है। इस तरह से उत्पादों को तैयार होने में कम समय लगता है और लागत भी कम आती है और नक्काशी के नष्ट होने की आशंका भी नहीं रहती है। उन्होंने कहा कि परंपरागत हुनर और नई आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सहारनपुर विश्व बाजार में चीन और दूसरे देशों को कड़ी चुनौती पेश कर सकता है। हाल ही में सहारनपुर के जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने मुलाकात के दौरान असलम सैफी की कारीगरी की सराहना की और उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को देखने की इच्छा जताई।
वरिष्ठ पत्रकार देवबन्द (सहारनपुर) उत्तर प्रदेश

Post a Comment

Previous Post Next Post