विधानसभा उपचुनाव की तरह पालिका चुनाव में भी गठबंधन का फार्मूला कामयाब होगा?

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

खतौली विधान सभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद निकाय चुनाव के बीच छाया सन्नाटा राजनीति में तेज आंधियां आने का संकेत दे रहा है। निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद निकाय चुनाव में चेयरमैन पद के संभावित प्रत्याशियों में अपना टिकट फाइनल कराने के लिए अपने-अपने दलों के राजनैतिक आकाओं की परिक्रमा तेज कर दी है।

विधानसभा उपचुनाव में जीत से उत्साहित सपा रालोद गठबंधन नगर पालिका चुनाव में भी विधानसभा उपचुनाव जैसी व्यूह रचना के प्रयास में है, लेकिन इस बार राह इतनी आसान नहीं रहने की संभावना है। बता दें कि विधानसभा उपचुनाव में बसपा व कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों ने हिस्सा नहीं लिया था, जिसके चलते बसपा व कांग्रेस वोटों का ध्रुवीकरण सपा रालोद गठबंधन के पक्ष में हो गया था। इस समीकरण में आजाद समाज पार्टी सुप्रीमो चंद्रशेखर रावण ने बसपा के आधार वोट बैंक को सपा रालोद गठबंधन के पक्ष में मोडने में महत्वपूर्ण व प्रभावी भूमिका भाई। इसी के चलते सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी जीत सुनिश्चित हो पाई थी।

पालिका राजनीति के जानकार बताते हैं कि निकाय चुनाव की तस्वीर विधानसभा उपचुनाव जैसी बिल्कुल सही नहीं रहेगी, ब्रज भूषण शर्मा, हकीम जफर महमूद, नरेश पालीवाल संजीव कुमार त्यागी आदि स्थानीय स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने खतौली पालिका के चेयरमैन पद के लिए पहले से ही प्रत्याशी घोषित कर रखा है, बस आला हाईकमान की मोहर लगना बाकी है, लेकिन यह तय है कि कांग्रेस नगर पालिका चेयरमैन पद पर अपना प्रत्याशी उतारने के लिए पूरी तरह मूड में है। इसी तरह बहुजन समाज पार्टी की ओर से भी निकाय चुनाव पूरी शिद्दत से लड़ने के संकेत मिल रहे हैं। इतना ही नहीं कई कद्दावर नेता खतौली की चेयरमैनी पाने की आस लगा रहे हैं, जिनमें एक पूर्व पालिका चेयरमैन सही बसपा के कई कद्दावर चेहरे शामिल हैं। 

राजनीति के जानकार बताते हैं पालिका चुनाव में अगर बसपा ने अपना प्रत्याशी उतारा तो विधानसभा उपचुनाव की तरह आजाद समाज पार्टी (आसपा) सुप्रीमो चंद्रशेखर रावण का जादू दलित वोटों पर चल पाएगा यह कहना मुश्किल है।

खतौली, जिला-मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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