शिवपुराण से (रूद्र संहिता तृतीय पार्वती खण्ड) (540) गतांक से आगे......

देवताओं का भगवान् शिव से पार्वती के साथ विवाह करने का अनुरोध्, भगवान् का विवाह के दोष बताकर अस्वीकार करना तथा पुनः प्रार्थना करने पर स्वीकार कर लेना

ब्रह्माजी कहते हैं- नारद! देवताओं ने वहां पहुंचकर भगवान् को प्रणाम करके उनकी स्तुति की। तब नन्दिकेश्वर ने भगवान् शिव से उनकी दीनबन्धुता एवं भक्तवत्सलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि- प्रभो! देवता और मुनि संकट में पड़कर आपकी शरण में आये हैं। सर्वेश्वर! आप उनका उद्धार करें। 

दयालु नन्दी के इस प्रकार सूचित करने पर भगवान् शम्भु धीरे-धीरे आंखे खोलकर ध्यान से उपरत हुए। समाधि से विरत हो परमज्ञानी परमात्मा एवं ईश्वर शम्भु ने समस्त देवताओं से इस प्रकार कहा। 

शम्भु बोले- श्रीविष्णु और ब्रह्मा आदि देवेश्वरों! तुम सब लोग मेरे समीप कैसे आये? तुम आने का जो भी कारण हो, वह शीघ्र बताओ।

भगवान् शंकर का यह वचन सुनकर सब देवता प्रसन्न हो कारण बताने के लिए भगवान् विष्णु के मुंह की ओर देखने लगे। तब शिव के महान् भक्त और देवताओं के हितकारी श्रीविष्णु मेरे बताये हुए देवताओं के महत्तर कार्य को सूचित करने लगे। उन्होंने कहा-शम्भो! तारकासुर ने देवताओं को अत्यन्त अद्भुत एवं महान् कष्ट प्रदान किया है। यही बताने के लिए सब देवता यहां आये हैं। भगवन्! आपके औरस पुत्र से ही तारक दैत्य मारा जा सकेगा और किसी प्रकार से नहीं।                  (शेष आगामी अंक में)

Post a Comment

Previous Post Next Post