शि.वा.ब्यूरो, मेरठ। वर्ष 2012 से 2017 के बीच जनपद मेरठ व बागपत में सरकारी सम्पत्तियों को वक्फ सम्पत्तियों में परिवर्तित करने सहित उक्त अवधि में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति में घोटाले व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जारी अन्य योजनाओं में किये गये फर्जीवाड़े की जांच के लिए गठित समिति को सहयोग करने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोई सहयोग नहीं करने, केवल पत्र लिखने तक सीमित रहने के लिए विभागीय विशेष सचिव द्वारा दोषी अधिकारी के खिलाफ केवल परनिन्दा दण्ड़ देकर क्षमादान दिया जाना विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना ही नहीं उन्हें दूसरे विभाग में उपनिदेशक का चार्ज प्रदान करके अप्रत्यक्ष रूप से सम्मानित किये जाने का कृत्य किया जाना भी विभागीय अफसरों के गले नहीं उतर रहा है।
बता दें कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच जनपद मेरठ व बागपत में सरकारी सम्पत्तियों को वक्फ सम्पत्तियों में परिवर्तित करने सहित उक्त अवधि में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति में घोटाले व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जारी अन्य योजनाओं में भारी घोटाले का मामला सुर्खियों में आया था। उक्त पर संज्ञान लेते हुए शासन द्वारा मामले की जांच करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था और विभागीय उपनिदेशक अमरनाथ पाण्डेय को निर्देश दिये गये थे कि वे उक्त कमेटी को सहयोग प्रदान करेंगे, लेकिन विभागीय अफसरों की मानें तो पूरा मामला और साक्ष्य उपनिदेशक अमरनाथ पाण्डेय के संज्ञान में होने के बावजूद उन्होंने कोई परिणामजनक सहयोग नहीं किया और खानापूर्ति के लिए बेवजह लिखापढ़ी करने का नाटक किया। इन सबके बावजूद विभागीय विशेष सचिव शीलधर सिंह यादव ने भी केवल परनिन्दा दण्ड़ की औपचारिकता निभा दी। विभाग के एक अधिकारी ने अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर शिक्षा वाहिनी को बताया कि पूरा प्रकरण उपनिदेशक अमरनाथ पाण्ड़ेय के संज्ञान में है और उन्हें इस बात की पूरी जानकारी है कि सम्बन्धित दस्तावेज कहां सुरक्षित रखे गये हैं, बावजूद उन्होंने अपना दोष दूसरे लोगों पर थोपने और अपनी गर्दन बचाने के उद्देश्य से लिखापढ़ी का नाटक किया है।
जानकारों की मानें तो उक्त प्रकरण में उपनिदेशक अमरनाथ पाण्ड़ेय की प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता हो सकती है। अगर मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। उनका मानना है कि उपनिदेशक अमरनाथ पाण्ड़ेय की चल-अचल सम्पत्ति की जांच भी की जानी चाहिए। बता दें कि ऐसे प्रकरणों के विभाग के कई अफसरों की गर्दन नप चुकी है।
