गौरव सिंघल, सहारनपुर। योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने नई पीढ़ी को सच से रूबरू करते हुए कहा कि ये सरासर झूठ है कि कोई सेंटा क्लाज हमारे सोते हुए ही हमारे लिए कोई तोहफा रखकर चला जाएगा। उन्होंने कहा कि भला सोते हुए इंसान को भी कभी कुछ मिला है क्या? उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि जिसने भी कुछ पाया है, जगकर और तप कर ही पाया है। उन्होंने कहा कि सोए हुए समाज को कुछ नहीं मिलता, सिवा छलावे के। उन्होंने कहा कि वह तो सिर्फ खोता ही है। उन्होंने कहा कि आइए! समय रहते जगें और जगाएं।
योग गुरू भारत भूषण बोले इस बात पर उन्हें चिड़ियाओं और बहेलिये की घटना याद आ गई, जो जंगल में आता था, जाल बिछाता था। मुफ्त में दाने पाने के लालच में पक्षी आते और जाल में फंस जाते, बहेलिया उन्हें पकड़कर इकट्ठे करता और बेच आता। रोजमर्रा इस सिलसिले के चलते पक्षियों की घटती संख्या देख, बुजुर्ग पंछियों को चिंता हुई, उन्होंने खोज निकाला कि ये बिना कुछ पाने का लालच ही इसकी वजह है। योग गुरु भारत भूषण ने कहा कि आज उनकी चिंता भी उस बुजुर्ग पंछी वाली है, जिसने सब पंछियों को बुलाकर उन्हें सब ठीक से समझाया, सब पंछी समझ भी गए। उन्होंने फैसला किया कि अब हम बहेलिए की चाल में नहीं फंसेंगे। बहेलियां आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, लेकिन हम वह दाना नहीं खाएंगे, इसलिए नहीं फंसेंगे। सभी ने इस फैसले को पक्का याद कर लिया। अगले दिन बहेलिया फिर से आया, उसने जाल फैलाया, दाने डाले, लेकिन काफी देर तक तो कोई पक्षी नहीं आया, सब पक्षी दूर बैठे एक-दूसरे की तरफ देखते रहे, परंतु थोड़ी देर बाद मुफ्त पाने की चाह में पंछियों से फिर नहीं रहा गया, वे उड़े, दाना पाने के लालच में जाल पर आ बैठे और फिर फंस गए। हम सब लोगों की यही स्थिति है, सीखना ही होगा कि बिना कुछ किए बहुत कुछ पा लेने का लालच हमें फंसाता ही है। हम भी लालची पंछी हैं हमें यह सीखना ही होगा कि अपने पुरुषार्थ और ईश्वर के न्याय पर विश्वास करें। लालच में फंसकर बहेलिया के चंगुल में आने वाले पंछियों का कभी कुछ भला नहीं हुआ है।
योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने नई पीढ़ी को सच से रूबरू करते हुए कहा कि हम केवल जश्न की चमक और बिना कुछ किए थोड़े से मुफ्त तोहफे पाने के कच्चे लालच में फंसते ही आए हैं। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी कल के राष्ट्र निर्माता हैं उन्हे खुली आंखों जीना सीखना होगा। उन्होंने कहा कि वह आज नेशन बिल्डर्स एकेडमी में बड़े दिन के उपलक्ष में बच्चों व शिक्षकों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने यही सिखाया है, स्वधर्मे निधनं श्रेय: पर धर्मं भयावह। अपने धर्म का पालन करने और उससे संवारने में ही हमारी भलाई है। उन्होंने कहा कि गाय का अपना धर्म है, सिंह का अपना, चिड़िया का अपना धर्म है और मछली का अपना। उन्होंने कहा कि गाय शेर वाला काम करने लगे, शेर गाय वाला काम करने लगे, चिड़िया मछली का काम करने लगे या मछली चिड़िया की तरह उड़ने की बात सोचें, तो भयावह स्थिति ही होगी।
उन्होंने कहा कि अपने स्वरूप से गिरने वाले व्यक्ति की स्थिति धोबी का कुत्ता घर का ना घाट का, वाली ही होती है वह कहीं का नहीं रह जाता। योग गुरु भारत भूषण बोले कि आज ईसाई भाइयों के लिए उनके मसीह ईसा का जन्म होने के कारण उनका बड़ा दिन है, उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी कि उस समाज को भी कोई राह दिखाने वाला महापुरुष मिला। उन्होंने कहा कि हमारे लिए तो केवल 25 दिसंबर ही नहीं, इस पूरे हफ्ते का हर दिन हमेशा बहुत ही बड़ा रहेगा, क्योंकि इन दिनों में हमने हिंदू संस्कृति के अपने खालसा पंथ के प्रवर्तक गुरु गोविंद राय से सिंह बनें। गुरुदेव की माता गूजरी, पिता गुरु तेग बहादुर व चारों पुत्रों को धर्म पर शहीद होते देखा।
उन्होंने कहा कि धर्म व मानवीय मूल्यों की रक्षा में पूरा परिवार भेंट चढ़ने वाले, सर्वस्व दानी गुरु के महान बलिदान ने शौर्य की अमर गाथा के साथ-साथ हमें गहरा शोक भी दिया। ऐसे में मैरी क्रिसमस के जश्न में डूबने के बजाय हमें स्वयं को संभालने और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शायद इसीलिए परमेश्वर ने हमें इसी हफ्ते में समय वीर उधम सिंह कंबोज सरीखे बलिदानी व दो दो भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय व अटल बिहारी बाजपई सरीखी विभूतियां दी। उन्होंने कहा कि अपनी संत परंपरा (सेंटा क्लॉज नहीं) संत क्लास यानी कैटेगरी का पर्व मनाने का गौरव पाएं व अपने समाज को जागृत रखें।


